तुमने रिश्ता तोड़ा भी

तुमने रिश्ता तोड़ा भी इतने सलीके से,
दर्द होता रहा और आवाज़ तक न हुई

 

जिसे अपना समझकर हर राज़ दे दिया,
उसी ने खामोशी को मेरी सज़ा बना दिया

 

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